जीवन बीमा निगम रीवा क्षेत्रीय कार्यालय में मानव संसाधन प्रबंध का विश्लेषणात्मक अध्ययन
डाॅ. खुशबू केशरी
अतिथि विद्वान (वाणिज्य), शासकीय विवेकानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय मैहर जिला सतना (म.प्र.)
*Corresponding Author E-mail:
ABSTRACT:
भारतीय जीवन बीमा निगम या एलआईसी, भारत की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी है और देश की सबसे बड़ी निवेशक कंपनी भी है। यह पूरी तरह से भारत सरकार के स्वामित्व में है। इसकी स्थापना सन् 1956 में हुई। इसका मुख्यालय भारत की वित्तीय राजधानी मुंबई में है। भारतीय जीवन बीमा निगम के 8 आंचलिक कार्यालय और 101 संभागीय कार्यालय भारत के विभिन्न भागों में स्थित हैं। इसके लगभग 2048 कार्यालय देश के कई शहरों में स्थित हैं और इसके 10 लाख से ज्यादा एजेंट भारत भर में फैले हैं। बीमा व्यवसाय एक सेवा क्षेत्र है। इस व्यवसाय की समस्त क्रियायें मानव संसाधनों द्वारा संचालित की जाती है। इस व्यवसाय की सफलता एवं असफलता व्यवसाय में लगे लोगों की योग्यता, कार्यक्षमता एवं व्यवहार पर निर्भर करता है। बीमा व्यवसाय सामाजिक सम्बन्धों को बेहतर बनकर ही व्यवसाय का मार्ग बढ़ा सकता है। बीमा अधिकारी कर्मचारियों से लेकर क्षेत्र में काम करने वाले बीमा एजेन्टों आदि की क्रियाशीलता व्यवसाय को आगे बढ़ाने में सहायक होती है। त्वरित सेवा सही सलाह व मार्गदर्शन एवं सतत क्रियाशीलता बीमा व्यवसाय के लिये आवश्यक होती है। देखने में आया है कि बीमा कार्यालय के जिस कर्मचारी द्वारा निवेशकों के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता, कार्य करने में देरी करता है उस कार्यालय में बीमा धारकों की संख्या प्रभावित होती रहती है। बीमा व्यवसाय में यह आवश्यक है कि इस व्यवसाय में लगे मानव संसाधन का प्रबन्धन उचित ढंग से हो। मानव संसाधन की क्रियाओं का लाभ इन संसाधन के विभिन्न क्रियाओं पर निर्भर रहती है। उचित भर्ती नीति चयन में पारदर्शिता उचित प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन कार्य योजना का सही चयन एवं निर्माण अभिप्रेरणात्मक क्रियाएं नियंत्रण एवं निर्देशन उचित पारिश्रमिक शिकायतों का निवारण एवं भविष्य के लिये उचित नियोजन आदि मानव संसाधन के विकास में सहायक होते हैं। बीमा व्यवसाय मानव संसाधन सम्बन्धित अनेक कठिनाईयां एवं समस्यायें शोध कार्य के दौरान देखी व पाई गई है।
KEYWORDS: जीवन बीमा, मानव संसाधन प्रबंधन, बीमा व्यवसाय, उपभोक्ता संतुष्टि।
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वर्तमान में प्रत्येक व्यक्ति संसार की इन अनिश्चिताओं एवं जोखिमों के झंझावतों में घिरा हुआ है। चाहे वह दुनिया का सबसे धनी व्यक्ति बिलगेट्स हो, सामान्य व्यक्ति हो, चाहे छोटा दुकानदार हो या विस्तृत औद्योगिक साम्राज्य का स्वामी, चाहे राजनेता या अभिनेता, खिलाड़ी हो या प्रायोजक, इन सभी को अनिश्चिताओं, जोखिमों एवं अनिष्ट की आषंकाओं ने घेर रखा है। सभी अपने जीवन, व्यवसाय, सम्पŸिा तथा सफलता आदि की चिंता में संलग्न रहते हैं। मानव सदैव से इन जोखिमों व रूकावटों से अपनी सुरक्षा के जोखिमों व रूकावटों से अपनी सुरक्षा के प्रयास करता रहा है। उसने सुरक्षा के अनेक उपाय खोजे जिनमें बीमा समस्त अनिश्चिताओं से मुक्ति पाने का अचूक उपाय सिद्ध होता गया है। सर्वप्रथम भर्ती की उचित व्यवस्था न होने के कारण भर्ती मानव संसाधन विकास की प्रथम प्रक्रिया है। उचित भर्ती नीति पर ही मानव संसाधन के विकास की कल्पना की जा सकती है। भर्ती ऐसी हो जिसकी सभी सूचनाएं अभ्यर्थियों तक सही समय पर पहुंच जाये एवं समय पर अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया में सम्मिलित हो सके। गुपचुप तरीके से की गई भर्ती सही व्यक्ति के चयन में बाधा उत्पन्न करती है। जिसका भविष्य में प्रभाव नकारात्मक पड़ता है। निश्चित समय पर भर्ती की कार्य योजना तैयार की जानी चािहये ताकि भर्ती के समय का ज्ञान अभ्यर्थियों को समय से पूर्व हो सके एवं भर्ती प्रक्रिया में सम्मिलित हो सके। बीमा व्यवसाय में समय-समय पर भर्ती की जाती है किन्तु उनका नियमन उचित नहीं है।
चयन का निश्चित मापदण्ड होना चाहिये जिसमें सफल होने पर ही कर्मचारी एवं अधिकारी की नियुक्ति की जानी चाहिये। चयन लिखित एवं मौखिक परीक्षा व्यक्तिगत एवं सामूहिक परिचर्चा एवं व्यक्तित्व परीक्षण के आधार पर किया जाना चाहिये। लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण होना ही योग्यता का सही चयन नहीं है। साक्षात्कार में सभी पहलुओं पर विचार करना चाहिये न कि सामान्य ज्ञान पर चयन में उन बिन्दुओं पर भी प्रश्न किया जाना चाहिये जो बीमा व्यवसाय से सीधे सम्बन्धित होते हैं। सही अभ्यर्थी व्यवसाय के संचालन एवं विकास में तभी सफल हो सकता है जब बीमा व्यवसाय संबंधित सभी विषयों का ज्ञाता हो व क्रियान्वयन में सफल हो बीमा व्यवसाय मानव संसाधन का चयन लिखित परीक्षा आर्हतादायी परीक्षाओं के अंक एवं साक्षात्कार में पूंछे गये प्रश्नों के उत्तर के आधार पर की जाती है। कभी-कभी अन्तरमुखी व्यक्ति भी बीमा व्यवसाय में चयनित हो जाते हैं किन्तु बाहिरमुखी प्रतिभा के अभाव में व्यवसाय में असफल हो जाते हैं। क्योंकि बीमा व्यवसाय के लिये लोगों को प्रभावित करने की क्षमता का होना अति आवश्यक है। बीमा व्यवसाय में अधिकारियों एवं कर्मचारियों का चयन उनके मधुर स्वभाव धैर्य, सहनशीलता अभिप्रेरित करने की क्षमता और कार्य को समय पर अंजाम देने की क्षमता होना चाहिये। आज समाज में मानव संसाधन की कमी नहीं है, योग्य व्यक्ति यदि व्यवसाय में आयेंगें तो व्यवसाय की प्रगति सुनिश्चित है।
पदोन्नति एक ऐसी प्रक्रिया है जो कर्मचारिों के मनोबल को ऊंचा बनाये रखने में सहायक होती है। पदोन्नति के द्वारा व्यक्ति के जीवन में उत्साह एवं स्फूर्ति का आभास कराती है। पदोन्नति में पदोन्नति उन्हीं लोगों की जानी चाहिये जिनकी उत्पादकता एवं व्यवसाय की लोकप्रियता व्यवसाय को आगे बढ़ाने में सहायक हो, पदोन्नति नीति स्पष्ट होनी चाहिये और उस नीति के कसौटी पर करने जाने पर खरे व्यक्ति की ही पदोन्नति की जानी चाहिये, धर्मजात क्षेत्रीयता, लिंग, भेद आदि के आधार पर पदोन्नति उचित नहीं है।
शोध के दौरान पाया गया की बीमा व्यवसाय में पदोन्नति नीति, व्यक्ति के गुणों की सही मूल्यांकन में पर्याप्त नहीं है, अधिकारियों के व्यक्ति सम्बन्ध भ्रष्ट आचरण एवं आर्थिक प्रलोभनों से भी पदोन्नति की शिकायतें बीमा व्यवसाय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से विचार विमर्श प्राप्त हुई सही पदोन्नति व्यवसाय के लिये अति आवश्यक है। योग्य एवं अनुभवी व्यक्ति को ही पदोन्नति की जानी चाहिये। किसी भी व्यवसाय को सफलता के लिये सेवा शर्तों की स्पष्ट नीति होना आवश्यक है। सेवा शर्ते सरल लोचपूर्ण एवं कर्मचारियों को कार्य के प्रति प्रेरित करने वाली होनी चाहिये, कठोर सेवा शर्तों से सेवा कर्मी निराश एवं हताश महसूस करते हैं। इसलिये सेवा शर्ते मानव संसाधन के अनुरूप होनी चाहिये।
प्रशिक्षण कर्मचारियों के अन्दर नवीनतम ज्ञान एवं परिवर्तनों को जानने की व्यवस्था है। समय-समय पर होने वाले प्रशिक्षणों में व्यवसायों में होने वाले परिवर्तनों को अपनाई जाने वाली तकनीकों एवं नवीन कार्य पद्धतियों का ज्ञान प्रशिक्षण के माध्यम से किया जाता है। समय-समय पर उचित प्रशिक्षण नवीन तकनीकी साधनों के द्वारा दिया जाना चाहिये ताकि अधिकारी, कर्मचारी द्वारा बीमा व्यवसाय को संचालित किया जा सके। सर्वेक्षण के दौरान पाया गया कि बीमा व्यवसाय में प्रशिक्षण व्यवस्था है किन्तु प्रशिक्षण के लिये चुने गये व्यक्ति का निष्पक्ष रूप से नहीं किये गये हैं। उच्च अधिकारी जिसे चाहते हैं उसे प्रशिक्षण में भेज देते हैं, सही व्यक्तियों का चयन कभी-कभी प्रशिक्षण के लिये नहीं किया जाता।
व्यवसाय में कार्य निष्पादन तत्पर्यता एवं निष्पक्षता पूर्ण किया जाना चाहिये। कार्य निष्पादन पर ही व्यवसाय के प्रति लोगों को आकर्षित करने में सहायक होता है। मृत्यु दावे परिवक्ता पूर्ण होने पर दावों का भुगतान समय पर सही ढंग से किया जाना चाहिये। सर्वेक्षण के दौरान देखा गया कि बीमा भुगतान कराने के लिये प्रयत्नशील रहते हैं किन्तु निष्पादन कुर्सी पर बैठे व्यक्ति जानबूझकर टालटूल करते हैं। बार-बार आने पर कहते हैं एवं कभी-कभी आर्थिक प्रलोभनों पर शीघ्र मामले निपटाने में रूचि दिखाने लगते हैं। प्रायः देखा गया है कि बीमा धारक एजेन्ट के व्यवहार से प्रभावित होकर उस विश्वास पर बीमा करवाता है किन्तु दावों का भुगतान करते समय बीमा एजेन्ट को एक किनारे कर दिया जाता है तथा उपभोक्ता कार्यालयीन कर्मचारी व्यवहार से एवं जटिल निष्पादन प्रक्रिया को ऊबकर अपने दावे छोड़ देता है, यह क्रिया बीमा व्यवसाय के लिये अनिष्टकारी है।
पूर्व शोध की समीक्षा:-
हरीश बी. बापट, विशाल सोनी और रितु जोशी (2014) ने अपने शोध पत्र ’चयनित सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की जीवन बीमा कंपनियों के उत्पाद की गुणवत्ता का एक अध्ययन’ में बताया कि एलआईसी के एकाधिकार को खतरा है और आईसीआईसी आई के विवेकपूर्ण जीवन के लिए निजी खिलाडि़यों का नेतृत्व करना शुरू कर दिया है। बाजार हिस्सेदारी पर कब्जा। लेखकों ने यह भी निष्कर्ष निकाला है कि आईसीआईसीआई प्रूडेटियल लाइफ ने अंतर की पहचान की है और सहानुभूति, बेहतर प्रतिक्रिया प्रणाली और प्रीमियम प्रदान करने के मामले में नेतृत्व किया है। उत्पाद अनुकूलन अच्छा है, लेकिन एलआईसी की तुलना में पहुंच और नेटवर्क कम है।
हरनाम सिंह (2014) ने उत्तर प्रदेश में जीवन बीमा उपभोक्ता के व्यवहार का अनुभवजन्य अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि जीवन बीमा आज किसी भी बाजार अर्थव्यवस्था का एक मुख्य आधार बन गया है क्योंकि इसने लंबे समय के लिए बड़ी रकम कमाने की भरपूर गुंजाइश दी है। वह यह भी सुझाव देते हैं कि कंपनियों के पोषित लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बीमा उद्योग के लिए उपभोक्ता संबंध प्रबंधन को बनाए रखने के शक्तिशाली लाभों की खोज करने का समय है।
प्रीति जहाँ और बिंदू रॉय (2015) ने जीवन बीमा उद्योग में एलआईसी की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया है। अध्ययन में पाया गया है कि स्प्ब् के कार्यालय की संख्या साल दर साल बढ़ती जा रही है, लेकिन जब कुल जीवन बीमा उद्योग में स्प्ब् के कार्यालयों की विकास दर का विश्लेषण किया जाता है, तो निजी क्षेत्र की बाजार रणनीतियों के साथ गला काट प्रतियोगिता के कारण हमेशा घटती प्रवृत्ति होती है जीवन बीमा कंपनियाँ। उन्होंने यह भी निष्कर्ष निकाला है कि कुल प्रीमियम के आधार पर, एलआईसी की बाजार हिस्सेदारी 2005-06 में मामूली रूप से 85.75ः घटकर 2011 में 69.78ः हो गई। लेकिन उसके बाद वर्ष 2011-12 और 2012 में बाजार में हिस्सेदारी बढ़ रही है। वे यह भी सुझाव देते हैं कि चूंकि निजी बीमा कंपनियां अब दिन में बाजार पर कब्जा कर लेती हैं, इसलिए एलआईसी को और अधिक सुविधाओं के साथ विभिन्न प्रकार की योजनाओं को लॉन्च करना चाहिए, ताकि इसकी आय राशि, विशेष रूप से प्रीमियम राशि में वृद्धि हो सके।
शोध प्रविधि:-
शोध प्रविधि का अर्थ इस अपनाई जाने वाली अध्ययन विधि से है और कोई भी अध्ययन तभी सार्थक सिद्ध हो सकता है। जबकि इसकी अध्ययन विधि पूर्ण तथा वैज्ञानिक विधि पर आधारित हो। म.प्र. रीवा जिले में अन्तः क्षेत्रीय औद्योगिक विषमताओं का अध्ययन एक विस्तृत विषय है। शोधार्थी द्वारा यह प्रयास किया गया है कि शोध कार्य करते समय उसकी विधि और तकनीकी जानकारियाॅ पूरी तरह उसी विधि पर आधारित हो। जिन पर शोधार्थी ने हर सम्भव प्रयास किया है। सम्बन्धित विषय पर हो रहें शोध पर पर्याप्त निष्कर्ष निकाला जा सके और इसकी प्रविधि पूर्ण रूप से वैज्ञानिक विधि पर ही आधारित रहे। शोधार्थी ने आवश्यकता के अनुरूप अध्ययन की सरलता व सीमा को ध्यान में रखकर जिला के विभिन्न विकासखण्डों को उद्योगों से सम्बन्धित सभी मुख्य विषयों पर गहन अध्ययन करने की कोशिश की है। जिसमें जिला के औद्योेगिक विषमता का स्वरूप तो शोध प्रविधि के रूप में स्पष्ट हो ही जाता है। यह जीवन बीमा निगम सामाजिक उत्तरदायित्व के विकास को प्रभावी बनाता है इसका अध्ययन ज्यादा महत्वपूर्ण है और शोध प्रबन्ध को लिखते समय उसके विषय एवं उसकी महत्व को परिपेक्ष्य रूप में ध्यान में रखकर महत्वपूर्ण विवेचन किया गया है। ज्ञान की किसी भी शाखा में ध्यान पूर्वक नये तथ्यों की खोज के लिये किये गये अन्वेषण या परीक्षण को शोध कहते है। शोध के प्रथम चरण में शासकीय, अर्द्धशासकीय व अशासकीय अधिकारियों से सम्पर्क कर रीवा जिले में जीवन बीमा योजनाओं का विपणन प्रबंध के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त किये गये है। साथ ही जिले में जीवन बीमा से सम्बन्धित प्रशासन, शासकीय एवं अशासकीय संस्थाओं के प्रतिवेदन एवं तथ्य एकत्र किये गये हैं। जीवन बीमा योजनाओं के विभिन्न प्रभारियों व अधिकारियों से सम्पर्क कर जिले में संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारियाॅ एकत्र किये गये है।
शोध का क्षेत्र -
शोध का क्षेत्र रीवा जिले स्थित जीवन बीमा निगम क्षेत्रीय कार्यालय के मानव संसाधन प्रबन्ध का विश्लेषणात्मक अध्ययन करना है। रीवा जिला मुख्यालय में जीवन बीमा निगम के दो कार्यालय स्थापित हैं। जो बीमा संबंधित समस्त कार्यों का सम्पादन करते हैं।
उनमें कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों की स्थिति का अध्ययन करना है। दोनों कार्यालयों के कार्य क्षेत्र सम्पूर्ण रीवा जिला जिसमें 11 तहसील एवं तथा जिले की कुल जनसंख्या 23,65,106 है। बीमा सम्बन्धित कार्यों का सम्पादन करने के लिये विभिन्न स्तर के अधिकारी एवं कर्मचारी है जिनके कार्यों की प्रकृति एवं क्षेत्र अलग-अलग है, उनके कार्यों में ओ वाली अनेक जटिलतायें हैं जिससे वे कैसे पाकर अपने कार्यों को अंजाम देते हैं, का अध्ययन कर जटिलताओं को कम करने का प्रयास करना है ताकि बीमा कार्य सुलभ एवं स्वीकार्य योग्य हो सके और उसका लाभ बीमाधारियों को प्राप्त हो, उनकी बचतों का सही उपयोग हो ताकि देश की अर्थव्यवस्था में पूंजी की उपलब्धता बराबर बनाई जा सके और अर्थव्यवस्था का चहुमुखी विकास सम्भव हो सके और जिसका लाभ देश के प्रत्येक व्यक्ति को मिल सके।
शोध की जटिलताएं एवं सीमायें -
चूंकि शोधार्थी पहली बार शोध कार्य को करता है, इसीलिये उसके मार्ग में अनेक ज्ञात एंव अज्ञात कठिनाईयां उपस्थित होती है। शोधार्थी अपनी योग्यता, कुशलता, कल्पनाशीलता एवं तारकितता के आधार पर जटिलताओं को समझता है उनके कारणों का पता लगता है। तत्पश्चात अपने बुद्धि के द्वारा जटिलताओं के पहचानने का प्रयास करता है। इस शोध कार्य में भी शोधार्थी को अनेक जटिलताओं का सामना करना पड़ा।
उद्देश्य -
आस्तियों का इसलिये बीमा किया जाता है क्योंकि उनके नष्ट होने की आशंका बनी रहती है या आकसिमक घटना घटित होने से अपने अपेक्षित जीवनकाल से पहले ही वे निष्क्रिय हो सकती है। ऐसी संभाव्य घटना खतरे कहलाती है। आग, बाढ़, टूट फूट, तडि़त चालन, भूकंप आदि खतरा कहलाता है यदि ऐसे खतरे आस्ति को क्षति पहुंचाते हैं तो हम कहते हैं कि वह आस्ति जोखिम युक्त है। खतरे घटनायें होती है, जोखिम परिणामी हानियां या क्षतियां हेाती है, भूकंप के खतरे के कारण किसी भवन के स्वामी को होने वाला जोखिम कुछेक लाख या करोड़ रूपये का हो सकता है। जो भवन की लागत, भवन में रखे माल भत्ते या क्षति की सीमा पर निर्भर करता है। जीवन बीमा निगम द्वारा चलाये जा रहे सामाजिक निगमीय उत्तरदायित्व कार्य का अध्ययन करना।
ऽ रीवा जिले में सभी बीमा कम्पनियों की एवं उनकी शाखाओं के माध्यम से जितने भी बीमा व्यवसायिक कार्य संचालित किए जा रहें है, उनकी समीक्षात्मक व्याख्या करना।
ऽ बीमा व्यवसाय क्षेत्र में आई.आर.डी.ए. की भूमिका को स्पष्ट कर वैधानिक पक्ष की व्याख्या करना।
ऽ बीमा धारको के अधिकारों के बारे में पता लगाकर उन्हें अवगत कराना।
ऽ बीमा धारकों की सुरक्षा एवं बीमा कम्पनियों पर अंकुश के दृष्टिकोण से नियमों एवं कानूनों पर आधारित जीवन बीमा के वैधानिक पक्ष को स्पष्ट करना।
ऽ रीवा जिले के सभी बीमा संस्थानों के संगठनात्मक ढांचे तथा कार्यप्रणाली की व्याख्या करना एवं उपभोक्ता संख्या का अंकलन करना।
तथ्यों का संकलन:-
क्या आप भारतीय जीवन बीमा निगम के बारे में जानते हैं?
उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि 50 उत्तरदाताओं में से 45 यानी 90 प्रतिशत लोगों को पता भारतीय जीवन बीमा निगम के बारे में जानकारी है जबकि 10 प्रतिशत लोग इससे अनभिज्ञ है।
क्या आपने भारतीय जीवन बीमा निगम में भारत से जुड़ी योजनाओं में निवेश किया है?
उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि 50 उत्तरदाताओं में से 35 यानी 70 प्रतिशत लोगों भारतीय जीवन बीमा निगम से जुड़ी योजनाओं में निवेश किया है जबकि 30 प्रतिशत लोग इसमें निवेश नहीं किया है।
आप अपना पैसा कहां लगाते हैं
उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि 30 प्रतिशत लोगों ने अपना पैसा इक्विटी फंड में लगाया है जबकि 20 प्रतिशत म्यूचुअल फंड, 14 प्रतिशत बीमा लिंक्ड इक्विटी स्कीम 10 प्रतिशत बांड में 6 प्रतिशत संपत्ति/रियल इस्टेट में तथा 20 प्रतिशत लोगों ने अपना निवेश अन्य स्थानों में कया है।
आप भारतीय जीवन बीमा निगम की मानव संसाधन नीतियों के बारे में क्या सोचते हैं?
उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि 36 प्रतिशत लोगों ने भारतीय जीवन बीमा निगम की मानव संसाधन नीतियों को उत्कृष्ट बताया है 30 प्रतिशत ने एलआईसी के नीतियों को औसत एवं 24 प्रतिशत ने अच्छा बताया है जबकि 10 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने खराब प्रतिक्रया दी है।
निवेश के समय मूल उद्देश्य क्या है
उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि 54 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने बताया कि निवेश के समय उनका मूल उद्देश्य नियमित वापसी होती है जबकि 30 प्रतिशत ने बताया कि उनका उद्देश्य आयकर लाभ तथा 16 प्रतिशत ने पूंजी विनियोग के बारे में प्रतिक्रया दी है।
क्या भारतीय जीवन बीमा निगम बेहतर दावा निपटान प्रदान करता है?
उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि 40 प्रतिशत लोगों ने भारतीय जीवन बीमा निगम दावा निपटान को औसत/संतोषजनक बताया है 30 प्रतिशत ने अच्छा एवं 20 प्रतिशत ने उत्कृष्ट बताया है जबकि 10 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने भारतीय जीवन बीमा निगम दावा निपटानके बारे में खराब प्रतिक्रया दी है।
निष्कर्ष एवं सुझावः
मानव स्वभाव अपने व्यक्तिगत स्वार्थ को लेकर बनता है, हर व्यक्ति अपना लाभ व स्वार्थ की पूर्ति करना चाहता है। प्रबन्धन कर्मचारियों से अधिक लाभ लेना चाहता है किन्तु प्रदान किये जाने वाले लाभ एवं सुविधा कम से कम देना चाहता है तथा कर्मचारी का कम लाभ और सुविधा अधिक पाना चाहता है और यह विवाद व्यवसायिक अशान्त पैदा करता है आज हर व्यक्ति जागरूक हो गया है। अन्य व्यवसायों एवं सेवाओं की भंाति इस व्यवसाय में भी अधिकारी अधिकतम लाीा पाना चाहते हैं जो औद्योगिक अशान्त उग्र होकर अदालत तक पहुंचा देती है। औद्योगिक विवाद किसी व्यवसाय के लिये कतई लाभदायक नहीं है इसे आपसी चर्चा एवं सहमति के आधार पर तय किये जाकर मधुर सम्बन्ध स्थापित किया जाना चाहिये। सर्वेक्षण के दौरान देखा गया कि अनेक कर्मचारी अधिकारी व्यवस्था से सतुष्ट नहीं है उनके समस्याओं का समुचित निराकरण न होने पर अदालत तक चले गये हैं जो उनकी कार्यक्षमता को प्रभावित करता है एवं बीमा व्यवसाय के लिये शुभ नहीं है। अतः ऐसी विवादों के जो अनेक कार्य हैं। जैसे - वेतन वृद्धि, सुविधायें, प्रशिक्षण, प्रमोशन एवं अनावश्यक जवाब तल आदि के द्वारा हुई है। इनका कारण अधिकारियों की हठधर्मिता है अपने कर्मचारियों की बात मानने में अपने प्रतिष्ठा के विरूद्ध मानते हैं।
रीवा के बीमा कार्यालय में भी ऐसे प्रकरण देखने को मिले हैं, इन्हीं कारणों को बीमा करने वाली गैर सरकारी कम्पनियों के और आकर्षित होने लगे हैं। कार्य मूल्यांकन मानव संसाधन का लेखा जोखा है। कार्य मूल्यांकन के माध्यम से ही कर्मचारियों की क्षमता क्रियाशीलता एवं व्यवसाय के लिये किये गये कार्यों का मूल्यांकन है। इसी मूल्यांकन के आधार पर कर्मचारियों की पदोन्नति अतिरिक्त आर्थिक लाभ एवं अन्य सुविधायें प्राप्त की जाती है। अतः मूल्यांकन कार्य निष्पक्षता पूर्ण एवं कार्य संपादन से संबंधित अनेक बिन्दुओं के आधार पर किया जाना चाहिये। मूल्यांकन में आधुनिक तकनीकों का भी प्रयोग किया जाना चाहिये।
निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि बीमा व्यवसाय एक सर्वश्रेष्ठ साधन है तथा पूंजी निर्माण में इसका महत्व योगदान है, जिसका श्रेय मानव संसाधन को जाता है। अतः मानव संसाधन प्रबन्ध को श्रेष्ठ व संग्रह बनाने का प्रयास किया जाना चाहिये।
संदर्भ ग्रन्थ सूची:-
1. वर्मा नरेश कुमार-‘‘जीवन बीमा का वैधानिक पक्ष’’ आई.सी., 24 वर्ष 1999-यूनिवर्सल इंश्योरेन्स बिल्डिंग सर फिरोजशाह मेहता, रोड मुम्बई।
2. जैन, डा0 एस0 सी0, मानव संसाधन प्रबंध, कैलाश पुस्तक सदन, भोपाल 2010
3. वर्मा नरेश कुमार-‘‘जीवन बीमा के प्रयोग’’ आई.सी., 23 वर्ष 1999 (अप्लीकेशन आॅफ लाइफ इंश्योरेन्स) यूनिवर्सल इंश्योरेन्स बिल्डिंग सर फिरोजशाह मेहता, रोड मुम्बई, वर्ष 1999।
4. जैन डा0 एस0 सी0, बीमा प्रबंध, कैलाश पुस्तक सदन, भोपाल, 2010
5. भारद्वाज नरेश चन्द्र-‘‘बीमा के सिद्धान्त’’ आई.सी. 01 यूनिवर्सल इश्योरेन्स बिल्डिंग सर फिरोजशाह मेहता, रोड़ मुम्बई।
6. मेमोरिया चतुर्भुज, औद्योगिक विवाद एवं श्रम संबंध, साहित्य भवन, आगरा, 2009
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Received on 07.12.2021 Modified on 21.12.2021 Accepted on 29.12.2021 © A&V Publications All right reserved Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2021; 9(4):157-163.
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